चौराहों पर सिग्नल न होने से जाम और हादसों का खतरा बढ़ रहा
लखनऊ : समता मूलक चौराहे से डालीगंज चौराहे तक बने ग्रीन कारीडोर के दूसरे चरण का शुक्रवार को लोकार्पण होने के बाद इसे आम जनमानस के लिए खोल दिया गया। हालांकि, इसकी डिजाइन और चौराहों पर लगने वाली वाहनों की कतार रफ्तार पर ब्रेक लगा रही है। कारीडोर पर पड़ने वाले चौराहों पर हादसों का खतरा भी बना हुआ है।
समता मूलक चौराहे से पेपरमिल कालोनी की तरफ बढ़ने पर ग्रीन कारीडोर का नवनिर्मित दूसरा चरण शुरू होता है। यहां से आगे बढ़ने पर संकल्प वाटिका चौराहा है। टीम 2:18 बजे यहां पहुंची तो सिकंदरबाग, झूलेलाल वाटिका, निशातगंज और ग्रीन कारीडोर की तरफ से वाहन एक साथ चौराहे पर आते दिखे।
यहां किसी भी तरफ सिग्नल व्यवस्था न होने से वाहन जगह मिलने पर मनमाने तरीके से निकलते रहे। चौराहे पर तैनात यातायात पुलिस कर्मी को वाहन पार करवाने में मशक्कत करनी पड़ी। सिग्नल नहीं होने के चलते यहां बड़े हादसे का खतरा बना है। लोगों का कहना है कि चौराहे की डिजाइन में कुछ बदलाव किया जाए या फिर अन्य व्यवस्था की जाए तभी यातायात सुचारू होगा और हादसे का खतरा टलेगा।
संकल्प वाटिका चौराहा पार करने के बाद टीम हनुमान सेतु चौराहे पर पहुंची। यहां परिवर्तन चौक, आइटी चौराहा, नदवा बंधा और पेपरमिल कालोनी की तरफ से वाहन चौराहे पर आते हैं। एक साथ वाहन आने से चौराहे पर जाम की स्थिति रही।
गोमती पुल से लेकर लखनऊ विश्वविद्यालय के सामने तक वाहनों की कतार नजर आई। यातायात पुलिस के जवान क्रमवार वाहनों को निकालते रहे जिससे लोगों को राहत मिली लेकिन लोगों को चौराहा पार करने में समय लग रहा था। यहां भी वैकल्पिक व्यवस्था की जरूरत दिखी।
डालीगंज चौराहे पर वाहनों के विपरीत दिशा से आने की समस्या नजर आई। टीम ग्रीन कारीडोर से उतरी जहां से बाइक, कार और अन्य वाहन लगभग 50 मीटर की दूरी तय कर डालीगंज चौराहे पर पहुंच रहे थे।
इन वाहनों को यदि सही दिशा से आना हो तो ग्रीन कारीडोर से उतरकर रिवरसाइड कालोनी स्थित इंजीनियर्स भवन के सामने बने कट से यू- टर्न लेकर करीब दो सौ मीटर दूरी तय करने के बाद यह चौराहे पर आ सकेंगे। डालीगंज चौराहे पर खड़े होने वाले टेंपो, टैक्सी वाहनों सामान्य यातायात के लिए बाधा बनते हैं।